जीवनी

प्रेरणादायक जीवनियाँ

  • March 23, 2024

भगत सिंह का नाम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में अंकित है। उनका जीवन साहस, बलिदान और देशभक्ति की अद्वितीय मिसाल प्रस्तुत करता है। उनका जन्म 28 सितंबर 1907 को पंजाब के बंगा गाँव में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में स्थित है। उनके परिवार का राष्ट्रीय आंदोलन में विशेष योगदान रहा था, जिसने भगत सिंह को स्वतंत्रता के महत्व को समझने के लिए प्रेरित किया।

जब जलियाँवाला बाग हत्याकांड के बारे में उन्होंने सुना, तो उनके मन पर गहरा प्रभाव पड़ा। देश की जनता पर हुए इस अत्याचार ने उन्हें ब्रिटिश शासन के विरुद्ध खड़े होने का संकल्प दिलाया। भगत सिंह ने अपनी शिक्षा के दौरान अनेक क्रांतिकारी गतिविधियों में हिस्सा लिया और अपने मित्रों के साथ नौजवान भारत सभा का गठन किया।

भगत सिंह की विचारधारा में बदलाव तब आया जब उन्होंने लाला लाजपत राय की मृत्यु के बाद ब्रिटिश अधिकारी जॉन सॉन्डर्स की हत्या में हिस्सा लिया। उनका मानना था कि ब्रिटिश हुकूमत को समझाने के लिए क्रांतिकारी कदम उठाना आवश्यक है। 1929 में उन्होंने असेम्बली में बम फेंका, जिसका उद्देश्य किसी को चोट पहुँचाना नहीं था, बल्कि ब्रिटिश सरकार को जगाना था। इस घटना के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

भगत सिंह ने जेल में रहते हुए अद्वितीय धैर्य और साहस का परिचय दिया। उनकी हिम्मत और विचारधारा ने पूरे देश में जागरूकता फैलाने का काम किया। 23 मार्च 1931 को भगत सिंह को राजगुरु और सुखदेव के साथ फाँसी दे दी गई। उनका बलिदान देशभक्ति की अमिट छवि बन गया।

उनकी जीवन कथा आज भी युवाओं को न केवल स्वतंत्रता और साहस के सिद्धांतों को समझने के लिए प्रेरित करती है, बल्कि यह चेतावनी भी देती है कि किसी भी अन्याय के खिलाफ संवेदनशील रहना चाहिए। भगत सिंह का जीवन हमें यह सिखाता है कि अपना उद्देश्य यदि देशहित में हो, तो किसी भी कठिनाई का सामना साहस के साथ किया जा सकता है। उनका योगदान और बलिदान हमारे दिलों में सदैव जीवित रहेगा।